जिम्बाब्वे में मुगाबे के हटने के बाद पहली बार हुआ राष्ट्रपति का चुनाव Other, अंतर्राष्ट्रीय

राबर्ट मुगाबे के पिछले साल राष्ट्रपति पद से हटने के बाद जिम्बाब्वे में सोमवार को पहली बार मतदान हुआ। इस चुनाव में विपक्ष ने कथित मतपत्र घोटाले से उबरकर सत्तारूढ़ जेडएएनयू-पीएफ को हराने का संकल्प जताया है।

मंगागावा, चमीसा मुख्य दावेदार : 
अफ्रीकी देश में हुए इस ऐतिहासिक चुनाव में जिम्बाब्वे अफ्रीकन नेशनल यूनियन पार्टी-पैट्रियाटिक फ्रंट (जेडएएनयू-पीएफ) पार्टी के 75 वर्षीय राष्ट्रपति एमर्सन मंगागावा और एमडीसी पार्टी के 40 वर्षीय नेल्सन चमिसा के बीच सीधा मुकाबला है। मंगागावा मुगाबे के करीबी सहयोगी रह चुके हैं। 

देशभर में उच्च मतदान :
राष्ट्रपति, विधायी और नगरपालिका चुनावों के लिए मतदान सुबह सात बजे शुरू हुआ। जल्द ही देश की राजधानी और अन्य हिस्सों में मतदान केंद्रों के बाहर लोग कतार में खड़े नजर आने लगे। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, शाम सात बजे तक चले मतदान के शुरुआती संकेत बताते हैं कि देशभर में उच्च मतदान हुआ है। 

मुगाबे ने भी मतदान किया :
लगभग 37 साल तक देश के राष्ट्रपति रह चुके 94 वर्षीय मुगाबे ने पत्नी ग्रेस के साथ राजधानी हरारे के एक मतदान केंद्र पर मतदान किया। मुगाबे पहली बार 1980 में आजादी के बाद सत्ता में आए थे। उन्हें पिछले साल नवंबर में सेना ने अपदस्थ कर दिया था। उन्होंने पहले ही साफ कर दिया था कि वह अपने उत्तराधिकारी के लिए वोट नहीं करेंगे। उन्होंने मतदाताओं से जेडएएनयू-पीएफ को खारिज करने की अपील की थी। 

युवा मतदाता होंगे निर्णायक :
मतदान के लिए पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 5,635,706 है। मतदान के लिए पूरे देश में 10,985 केंद्र बनाए गए थे। यहां युवाओं का वोट महत्वपूर्ण होने की उम्मीद है, क्योंकि पंजीकृत लोगों में से 43.5 प्रतिशत वोटरों की उम्र 35 साल से कम है।
 

मतदान की प्रकिया सुचारू रूप से सुनिश्चित करने के लिए सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को तैनात किया गया था। विपक्ष ने बार-बार मतदाताओं के पंजीकरण में अनियमितताओं का आरोप लगाया है। यदि विजेता 50 प्रतिशत से अधिक वोट नहीं हासिल कर पाता है तो दूसरे दौर का चुनाव 8 सितंबर को होगा। 
 

कई मामलों में यह चुनाव अव्यवस्थित रहा : ईयू
जिम्बाब्वे में सोमवार को हुआ चुनाव कई मामलों में काफी सुगम तो कुछ मामलों में पूरी तरह अव्यवस्थित रहा। यूरोपीय संघ (ईयू) के मुख्य पर्यवेक्षक एलमार ब्रॉक ने सोमवार को बताया कि बहुत से मतदाता, विशेषकर महिलाएं मतदान प्रक्रिया में देरी होने के कारण परेशान होकर बिना मतदान किए ही लौट गईं। मिशन फिलहाल इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा है कि इस मतदान को किस तरह से आंका जाए। इस बीच विपक्ष के मुख्य नेता नेल्सन चमिसा ने कहा कि उनके प्रभाव वाले शहरी क्षेत्रों में मतदान को हतोत्साहित और बाधित करने की कोशिशें की गईं। 

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