पीजीआई में क्रायो ट्रांस ब्रांकियल लंग बायोप्सी शुरू Other, स्वास्थ्य

पीजीआई में फेफड़े की बीमारी की जांच आसान हो गई है। बिना चीरा फेफड़े के कैंसर व दूसरी बीमारी का पता लगाया जा सकेगा। यह संभव हुआ है क्रायो ट्रांस ब्रांक्रियल लंग बायोप्सी (सीटीबीएलबी) से। इससे फेफड़े के ट्यूमर व दूसरे मांस के टुकड़े का नमूना (बायोप्सी) एकत्र किया जा सकता है। अभी तक ऑपरेशन कर बायोप्सी जांच के लिए नमूना एकत्र किया जाता था। इसकी वजह से मरीज को खासी दुश्वारी झेलनी पड़ती थी।

पीजीआई के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. आलोक नाथ बताते हैं कि क्रायो ट्रांस ब्रांक्रियल लंग बायोप्सी में चीरा लगाने की जरूरत नहीं पड़ती है। इससे फेफड़े की गंभीर बीमारी आईएलडी (इंटरइस्टीशियल लंग डिजीज) का पता लगाया जा सकता है। फेफड़े के कैंसर का भी सटीक पता लगाना सरल हो गया है।

ऐसे होती है बायोप्सी

इसमें प्रोब (एक उपकरण) जिसे मुंह के रास्ते मरीज के सांस की नली से फेफड़े तक पहुंचे हैं। उपकरण के आगे के हिस्से का तापमान सामान्य से 70 डिग्री सेल्सियस कम होता है। इसमें ऊतक का करीब पांच मिमी का टुकड़ा चिपक जाता है। इस टुकड़े को बाहर निकाल लिया जाता है। इस बायोप्सी से बीमारी का पता लगाया जाता है। अभी तक इसी नमूने को एकत्र करने के लिए चीरा लगाना पड़ता था।

आईएलडी खतरनाक बीमारी है

पल्मोनरी विभाग के डॉ. अजमल खान बताते हैं कि फेफड़े की बीमारी आईएलडी (इंटरइस्टीशियल लंग डिजीज) 150 से अधिक प्रकार की होती है। आईएलडी में फेफड़े सिकुड़ जाते हैं। इसकी वजह से खून में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। मरीज को सांस लेने में परेशानी होती है। सांस फूलने लगती है। मरीज को थकान महसूस होती है। आईएलडी के तहत पल्मोनरी फाइब्रोसिस बीमारी अधिकांश मरीजों में पाई जाती है। इसके अलावा सारकाइडोसिस, हाइपर सेंसिटिविटी न्युमोनाइटिस, कनेक्टिव टिश्यू डिजीज और आक्यूपेशनल लंग डिजीज समेत अन्य बीमारियां हैं। 

आईएलडी के लक्षण

आईएलडी में मरीज को सांस लेने में सबसे ज्यादा तकलीफ होती है। इसके अलावा चलने या काम करने में सांस फुलना व बार-बार खांसी आना इसके प्रमुख लक्षण हैं। इस बीमारी से पीड़ित करीब 70 मरीज एक साल में आते हैं।

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