यूपी में हर साल डायरिया छीन रहा 25 हजार मासूमों की सांसें Other, स्वास्थ्य

यूपी में हर साल दस्त से 25,000 मासूमों की सांसें थम रही हैं। इन बच्चों की मौत के आंकड़ों में ओआरएस और जिंक की गोलियों से कमी लाई जा सकती है। डायरिया से होने वाली 95 प्रतिशत तक की मौत के आंकड़ों में कमी लाई जा सकती है। अफसोस की बात है कि लोग ओरआरएस व जिंक टैबलेट को लेकर संजीदा नहीं हैं। डॉक्टर भी डायरिया से पीड़ित बच्चों को ओरआरएस व जिंक देने से परहेज कर रहे हैं। यह चिंता परिवार कल्याण विभाग की महानिदेशक डॉ. नीना गुप्ता ने जाहिर की।

वह शुक्रवार को लोहिया संस्थान के प्रेक्षागृह में दस्त नियंत्रण पखवाड़ा का शुभारंभ मौके पर मौजूद थीं। महानिदेशक ने कहाकि डायरिया पर बच्चों को ओआरएस पैकेट व जिंक गोली देने में कोताही बरती जा रही है। ग्रामीण क्षेत्र की स्थिति और भी बदतर है। उन्होंने कहाकि डॉक्टर डायरिया होने पर बच्चों को तुंरत ओरआरएस का घोल पीने की सलाह दें। पांच साल तक इस बीमारी को गंभीरता से लेना चाहिए। कार्यक्रम में संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुब्रत चन्द्रा, सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आरवी सिंह व सीएमओ के प्रवक्ता डॉ. एसके सक्सेना समेत अन्य डॉक्टर मौजूद थे।

जागरूकता से कम होगी बच्चों की मौत

परिवार कल्याण मंत्री स्वाति सिंह ने कहा कि डायरिया को जागरूकता से हराया जा सकता है। सरकारी अस्पतालों में ओआरएस व जिंक की गोली मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही हैं। वहीं, पखवाड़े के तहत स्वास्थ्य कार्यकर्ता घरों में जाकर ओआरएस व जिंक की गोली बाटेंगे। उन्होंने कहा कि यूपी में हर साल दो लाख 80 हजार बच्चों की मौत पांच वर्ष की उम्र के भीतर हो रही है। इसमें निमोनिया और डायरिया से काफी बच्चों की मौत हो रही है।

ओआरएस व जिंक गोली से बेहतर इलाज

नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) में कार्यक्रम प्रबंधक अमित मेहरोत्रा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में डायरिया से पीड़ित महज 37.9 प्रतिशत बच्चों को ही ओआरएस मुहैया कराया जा रहा है। 12.6 प्रतिशत बीमार बच्चों को ही जिकं गोली दी जा रही है। उन्होंने कहाकि अभी एक हजार बच्चों में 47 की मौत हो रही है। इस आंकड़े को 27 पर लाने का लक्ष्य है। 

स्तनपान कराएं शिशु को

एनएचएम के संयुक्त निदेशक निखिल चन्द्र ने कहा कि डायरिया की वजह से शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इसका असर आंतों पर पड़ता है। इससे बच्चे कुपोषित भी हो जाते हैं। पेट गड़बड़ा जाता है। उन्होंने कहा कि शिशु को जन्म के तुंरत बाद स्तनपान कराएं। इससे बच्चे में रोगों से लड़ने की ताकत पैदा होती है। 

साफ-सफाई का रखे खयाल

लोहिया संस्थान के निदेशक डॉ. दीपक मालवीय ने कहा कि डायरिया जैसी बीमारियों से मासूमों को बचाने के लिए साफ-सफाई पर ध्यान दें। साफ पानी पिलाएं। संक्रमण से बचाएं, क्योंकि गंदगी ही बीमारियों की असल वजह है।

ऐसे बचें डायरिया से

  • ताजा खाना खाएं। ठंडे खाने को गर्म करके ही खाएं। ठंडे खाने में बैक्टीरिया पनप आते हैं

  • खाना हमेशा ढक कर रखें

  • बच्चों को पूरा टीकाकरण कराएं

  • घर के आस-पास सफाई रखें 

  • शौच के बाद हाथ साबुन से धोएं

  • खाना बनाने व परोसने से पहले साबुन से हाथ धोएं

  • खुले में शौच न जाएं।

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