BREAKING NEWS

SC ने सरकार से पूछा- ASI से नहीं पूछेंगे तो कैसे होगी ताजमहल की रखवाली

120

उच्चतम न्यायालय ने ताजमहल की सुरक्षा और संरक्षण के लिये विजन डॉक्यूमेंट का ड्राफ्ट दाखिल करने पर उत्तर प्रदेश सरकार को आज आड़े हाथ लिया और जानना चाहा कि क्या शीर्ष अदालत को इसका अध्ययन करना है। न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगायी और इस मामले के प्रति उसकी गंभीरता पर सवाल भी किये। पीठ ने उप्र सरकार के वकील से सवाल किया, ‘आपने योजना का ड्राफ्ट क्यों दिया है ? क्या हमें आपके लिये इसकी जांच करनी है ? क्या इसकी जांच करना हमारा काम है?

शीर्ष अदालत ने कहा कि आश्चर्य है कि विजन डॉक्यूमेंट का ड्राफ्ट तैयार करते समय इस विश्व धरोहर के संरक्षण के लिये जिम्मेदार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से कोई परामर्श नहीं किया गया। सुनवाई के दौरान पीठ ने अटार्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल से जानना चाहा कि क्या केन्द्र या संबंधित प्राधिकारियों ने ताजमहल के प्रबंधन के बारे में योजना पेरिस स्थित यूनेस्को के विश्व धरोहर केन्द्र को सौंपी है।

पीठ ने कहा, ‘उस स्थिति में क्या होगा, यदि यूनेस्को यह कह दे कि हम ताज महल का विश्व धरोहर का दर्जा वापस ले लेंगे? इस सवाल के जवाब में अटार्नी जनरल ने कहा कि ताजमहल दुनिया के सात अजूबों में से एक है और यदि इस ऐतिहासिक स्मारक का विश्व धरोहर का दर्जा वापस लिया जाता है तो यह देश के लिये बहुत ही शर्मिन्दगी वाली बात होगी।
शीर्ष अदालत ने वेणुगोपाल से यह भी जानना चाहा कि केन्द्र और राज्य सरकार के किस विभाग के पास ताज ट्रैपेजियम जोन की देखभाल की जिम्मेदारी है। ताज ट्रैपेजियम जोन करीब 10,400 किलोमीटर में फैला है और इसके दायरे में उप्र के आगरा , फिरोजाबाद , मथुरा , हाथरस और ऐटा तथा राजस्थान का भरतपुर जिला शामिल है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार से कहा कि विजन डॉक्यूमेंट का ड्राफ्ट इंटैक (इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हैरिटेज) सहित संरक्षण विशेषज्ञों के पैनल को भी उनकी टिप्पणियों के लिये सौंपा जाये। पीठ ने इस मामले को अब 28 अगस्त के लिए सूचीबद्ध किया है। उस दिन इस ड्राफ्ट पर हुयी प्रगति पर विचार किया जायेगा।




Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *