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जयंती: …तो इसलिए मीना कुमारी को अनाथालय छोड़ आए थे उनके पिता

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अपने दमदार और संजीदा अभिनय से दिलों पर छा जाने वाली ट्रेजडी क्वीन मीना कुमारी का जन्म 1 अगस्त 1933 को मुंबई में हुआ था। मीना कुमारी के जन्म से पहले उनकी दो बहने और थीं। मीना के पिता अली बक्श अपनी तीसरी औलाद लड़का चाहते थे, लेकिन तीसरी भी बेटी होने से वो उदास हो गए और मीना कुमारी को अनाथालय छोड़ आए। लेकिन बाद में उनकी पत्नी के आंसुओं ने बच्ची को अनाथालय से घर लाने के लिए मजबूर कर दिया। मां ने बेटी का चांद सा चेहरा देख उसका नाम रखा महजबीं। बाद में यही महजबीं फिल्म इंडस्ट्री में मीना कुमारी के नाम से मशहूर हुईं।

वर्ष 1939 मे बतौर बाल कलाकार मीना कुमारी को विजय भटृ की ‘लेदरफेस’ में काम करने का मौका मिला। वर्ष 1952 मे मीना कुमारी को विजय भटृ के निदेर्शन में ही ‘बैजू बावरा’ में काम करने का मौका मिला। फिल्म की सफलता के बाद मीना कुमारी बतौर अभिनेत्री फिल्म इंडस्ट्री मे अपनी पहचान बनाने मे सफल हो गईं। साल 1962 मीना कुमारी के सिने करियर का अहम पड़ाव साबित हुआ। इस वर्ष उनकी आरती, मैं चुप रहूंगी और साहिब बीबी और गुलाम जैसी फिल्में प्रदर्शित हुईं। इसके साथ ही उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया गया। यह फिल्मफेयर के इतिहास मे पहला ऐसा मौका था जहां एक ही एक्ट्रेस को फिल्मफेयर के तीन नोमिनेशन मिले थे।

मीना कुमारी के करियर में उनकी जोड़ी अशोक कुमार के साथ काफी पसंद की गई। मीना कुमारी को उनके बेहतरीन अभिनय के लिए चार बार फिल्मफेयर के बेस्ट एक्ट्रेस के पुरस्कार से नवाजा गया है। इनमें बैजू बावरा, परिणीता, साहिब बीबी और गुलाम और काजल शामिल है। मीना कुमारी यदि एक्ट्रेस नहीं होती तो शायर के रूप में अपनी पहचान बनाती। बता दें कि मीना कुमारी ने अपनी वसीयत में अपनी कविताएं छपवाने का जिम्मा गुलजार को दिया जिसे उन्होंने ‘नाज’ उपनाम से छपवाया। लगभग तीन दशक तक अपने संजीदा अभिनय से दर्शकों के दिल पर राज करने वाली अभिनेत्री मीना कुमारी 31 मार्च 1972 को हमेशा के लिए अलविदा कह गईं। 




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