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मराठा आंदोलन:सरकारी पदों पर निकली 72 हजार भर्तियों ने दी आंदोलन को हवा

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महाराष्ट्र एक बार फिर से मराठा आंदोलन के चलते जल उठा। आरक्षण की मांग को लेकर अड़े प्रदर्शनकर्ताओं ने हालांकि बुधवार को आंदोलन वापस लेने की घोषणा कर दी, लेकिन इससे पहले राज्य के कई हिस्से विरोध की आग में झुलस उठे। मराठा समुदाय की मांग लंबे समय से है और इस बार राज्य में सरकारी पदों के लिए निकाली गई 72 हजार भर्तियों ने हवा दी।

मराठा समुदाय सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण की मांग कर रहा है। इन भर्तियों के निकलने के बाद समुदाय ने मांग की कि सरकार आरक्षण की ऐसी व्यवस्था करे, जिसे अदालत खारिज न कर पाए। साथ ही तब तक इन भर्तियों पर रोक लगा दी जाए। बार-बार मराठा समुदाय के विरोध के पीछे कुछ और कारण भी हैं।
हालांकि मराठा समुदाय का राज्य की राजनीति में अच्छा खासा दबदबा है। साथ ही ओबीसी व दलितों की तुलना में उनके पास खेती भी ज्यादा ही है। मगर नए आर्थिक ढांचे में खेती से कमाई से ज्यादा अहम शिक्षा और नौकरी मानी जा रही है। इसी वजह से उन्हें सामाजिक व आर्थिक स्तर पर पिछड़ने का डर सता रहा है।

‘इकोनॉमिक एंड पॉलटिकल वीकली’ (ईपीडब्ल्यू) में 2016 में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार जमीन के मामले मराठा ओबीसी व दलितों की तुलना में कहीं आगे हैं, लेकिन उच्च शिक्षा के मामले में वे पिछड़ जाते हैं। साथ ही ऐसा नहीं है कि सभी मराठा अच्छी खेती कर रहे हैं। सूखे आदि की समस्या से उनकी कमाई भी कम हो रही है।

आंदोलन के प्रमुख चेहरे

मराठा क्रांति मोर्चा
-इस संगठन के कई संयोजकों ने मिलकर पूरे आंदोलन को हवा दी
-पहले रेप दोषियों को सजा दिलाने के लिए भी मराठा लोगों को एकजुट कर चुका है संगठन
-शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन के लिए पहचान बनाई थी इस संगठन ने

मारुति भापकर
-शिवसेना के पूर्व पार्षद को एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता है
-पिंपड़ी चिंचवाड़ और पुणे में वह मराठा नेता के रूप में पहचान बना चुके हैं
-भापकर ने आरटीआई के जरिए लावासा घोटाले की पोल खोली, जिसमें शरद पवार का परिवार फंसा
-2009 में आम आदमी पार्टी की टिकट पर भी चुनाव लड़े
-अन्ना हजारे के आंदोलन से पहले दिन से ही जुड़े थे

संतोष शिंदे
-संभाजी ब्रिगेड के अध्यक्ष हैं संतोष शिंदे
-मशहूर नाटककार राम गणेश गडकरी की मूर्ति ढहाने को लेकर चर्चा में आए
-आरोप थे कि इनके नाटक में शिवाजी का अपमान किया गया था
-मराठा आंदोलन को उग्र देने के पीछे इसी संगठन का हाथ माना जा रहा
-अक्सर उग्र आंदोलनों के लिए ही संगठन की पहचान बनी
-2016 में खुद को राजनीतिक पार्टी के रूप में दर्ज कराया




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